क्या नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी की मान्यता खतरे में डालने से बिहार शिक्षित बनेगा – आसिफ

नीतीश बताएं गैर जिम्मेदार अफसरों को सजा के बदले आठ विश्वविद्यालयों का वेतन क्यों रोका-आसिफ

IMG_4432नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रात्य की शिक्षा व्यवस्था को तहस नहस करने पर तुले हैं, यह आरोप लगाते हुए आल इंडिया माइनोरिटी फ्रंट के अध्यक्ष एस एम आसिफ ने कहा है कि नीतीश कुमार नहीं चाहते कि राज्य के नौजवान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि पटना स्थित खुला नालंदा विश्वविद्यालय को सरकार ने सिर्फ दस एक भूमि प्रदान कर इस विश्वविद्यालय की मान्यता कायम रहने पर सवालिया निशान लगा दिया है। जबकि किसी भी दूर शिक्षा संस्थान के लिए 40 एकड़ में निर्माण होना जरूरी होता है।

जनाब एस एम आसिफ ने यहां जारी बयान में कहा है कि इसी तरह बिहार की निरंकुश सरकार ने    आठ विश्वविद्यालयों के कुलचसिचवों, वित्त पदाधिकारियों (एफए) का वेतन बंद करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही वित्त पदाधिकारी तथा बजट शाखा के सभी कर्मियों का भी वेतन भुगतान आदेश पालन होने तक बंद रहेगा।  उनमें वीकेवीएस आरा, जेपी विश्वविद्यालय छपरा, एलएमएनयू दरभंगा, मुंगेर विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर, मगध विवि बोधगया और मौलाना मजहरुल हक अरबी-फारसी विविपटना शामिल हैं। इन आठ में से पांच विश्वविद्यालयों वीकेवीएस आरा, जेपी विवि छपरा, एलएमएनयू दरभंगा, मुंगेर विवि, पूर्णिया विवि के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) व एफए समेत कर्मियों का वेतन बंद रखने का निर्देश दिया गया है।

फ्रंट के अध्यक्ष ने कहा है कि इन विश्वविद्यालयों में अगर अनियमितताएं हुई हैं तो सम्बन्धित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ निलम्बन व निष्काशन की कार्यवाही की जा सकती थी। उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया जा सकता था। उनके दोषों की सजा अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन रोक कर क्यों दी जा रही है। आसिफ ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि सरकार कोरोना काल में आम कर्मचारियों व निर्दोषों का वेतन रोक कर उनके परिवारों को सजा क्यों दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने इस तानाशाहाना आदेश को वापस ले और निर्दोषों को राहत दे।

जनाब आसिफ ने कहा कि राज्य का इकलौता नालंदा खुला विश्वविद्यालय अकेला ऐसा विवि है, जिसमें दूर शिक्षा के माध्यम से सवा लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल हैं। उसको नियमानुसार जमीन आंटित न करना नीतीश सरकार का शिक्षा के प्रति तंग नजरिये को ही रेखांकित कर रहा है।

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