सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश का भाईचारा होगा मजबूत, नफरत फैलाने वालो को मिला सबक : आसिफ

यूपीएससी में मुसलमानों की भर्ती प्रोग्राम पर सुप्रीम कोर्ट का स्वागत : आसिफ
केन्द्र सरकार को नफरत और विभाजन फैलाने वालों पर एनएसए लगा कर उन्हें जेल भेजना चाहिए: आसिफ

IMG_4432नई दिल्ली। आल इंडिया माइनोरिटी फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस एम आसिफ ने यूपीएससी में चयनित मुसलमानों के प्रति नफरत और उनकी देश भक्ति पर शंका खड़ी करने वाले टीवी चैनल के कार्यक्रम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने सुप्रीम अदालत के इस फैसले से समाज में जहर घोलने वाली ताकतों को सबक मिलेगा।

यहां नई दिल्ली से जारी बयान में उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी द्वारा मुसलमानों के सिविल सेवा में चुने जाने को लेकर दिखाए जा रहे कार्यक्रम पर सख्त एतराज़ जताते हुए बचे हुए एपिसोड दिखाने पर रोक लगा कर पुनीत कार्य किया है। जिसकी देश भर में सराहना हो रही है। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की खंडपीठ के अध्यक्ष न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस चैनल की ओर से किए जा रहे दावे घातक हैं और इनसे यूपीएसी की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लांछन लग रहा है। और ये देश का नुक़सान करता है। इस चैनेल ने यूपीएस सी में परीक्षा में हिन्दू मुस्लमान प्रत्याशियों को मिलने वाले अवसरों और उम्र  लेकर झूठ बोला और देश में  भ्रम पैदा करने भी कोशिश की  थी।

उन्होंने  बताया कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने यहां तक कहा कि एक ऐंकर आकर कहता है कि एक विशेष समुदाय यूपीएससी में घुसपैठ कर रहा है। क्या इससे ज़्यादा घातक कोई बात हो सकती है। ऐसे आरोपों से देश की स्थिरता पर असर पड़ता है और यूपीएससी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लांछन लगता है।

आसिफ ने कहा कि हैरत की बात यह है कि सरकार ने अदालत का सम्मान नहीं किया , क्योंकि जब हाई कोर्ट ने लगाई थी रोक, फिर भी सूचना मंत्रालय ने जहर फैलाने वाले कार्यक्रम को केसे प्रसारण की  दे दी थी इजाज़त। उन्होंने राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला की सराहना करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस निर्णय तक पहँुचने के लिए दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस कार्यक्रम पर 28 अगस्त को रोक लगा दी थी। जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश नवीन चावला ने इस कार्यक्रम के प्रसारण के ख़िलाफ़ स्टे ऑर्डर जारी किया था। मगर 10 सितंबर को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चैनल को ये कार्यक्रम प्रसारित करने की इजाज़त दे दी।

आसिफ ने कहा है कि देश में जात-पात करने वालों धर्म विशेष के खिलाफ नफरत फैलाने वाले लोगों के खिलाफ सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिएं। और समाज को देश की एकता अखण्ता की रक्षा के लिए  ऐसी हरकतों का खुल कर विरोध करना चाहिए।

आसिफ ने कहा कि मीडिया को समाज में सौहार्द और आम जन के दुख दर्द की आवाज उठनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि पूनावाला ने   इस बारे में न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन   के अध्यक्ष रजत शर्मा को एक पत्र लिख उनसे इस कार्यक्रम का प्रसारण रुकवाने और सुदर्शन न्यूज़ तथा इसके संपादक के विरूद्ध क़ानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

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