मुख्यमंत्री को चुनाव आयोग का डर न हाई कोर्ट की परवाह -आसिफ

लोकतांत्रिक संस्थाओं को नीतीश अपने पैरों तले रौंदना चाहते है – आसिफ

IMG_4432नई दिल्ली। आल इंडिया माइनोरिटी फ्रंंट के अध्यक्ष एस एम आसिफ ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर प्रशासनिक मनमानी और रोकतांत्रिक संस्थाओं की अवहेलना किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सरकार चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों को नहीं मान रही है इसलिए पटना हाई कोर्ट को उसके खिलाफ आदेश जारी कर रही है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वरदहस्त प्राप्त है इस गुमान में वे किसी भी नियम कायदे और कानून की परवाह नहीं कर रहे हैं। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री का पद दिलवाया वही जनता उनका तख्त ओ ताज छीनने की शक्ति रखती है।

जनाब आसिफ ने कहा कि हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन किया जाने के बावजूद उस गैर कानूनी निर्माण योजना पर रोक लगाई थी। और अब  पटना हाईकोर्ट के  चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने बिहार चुनाव के मद्देनजर जारी गाइडलाइंस का  पालन नहीं किए जाने को लेकर नोटिस जारी किया गया। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव और वित्त विभाग के प्रधान सचिव के साथ-साथ चुनाव आयोग से दो दिन में जवाब देने का निर्देश दिया है।  चुनाव आायोग ने सरकार को निर्देश दिया गया था कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात होने वाले वैसे अधिकारी और कर्मियों का तुरंत ट्रांसफर हो, जो अपने गृह जिले में पदस्थापित हों या एक ही जिले में चार साल से अधिक समय से कार्यरत हों। इस निर्देश के अनुपालन में कुछ तबादले हुए, लेकिन 42 अधिकारी ऐसे हैं, जो चार साल से अधिक समय से एक ही जिले में पदस्थापित हैं। इनमें कई कोषागार पदाधिकारी भी हैं।  न्यायालय ने मामले में 2 दिनों के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।
फ्रंट के अध्यक्ष एस आसिफ कहा कि चुनाव आयोग के निर्देशों के बावजूद यह सरकार मनमानी ही नहीं कर रही बल्कि बिहार की जनता को भरमाने के लिए लगातार लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा कर रही है।   हाई कोर्ट व चुनाव आयोग को इन घोषणाओं को अपनी कार्यवाही का हिस्सा बनाना चाहिए। लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए विधिवेत्ताओं को ऐसे मामले आदालत तक पहँुचाने चाहिएं।

उन्होंने कहा कि पन्द्रह वर्षों तक सोई रहने वाली सरकार को अब बेरोजगारों की याद आई है। इसलिए बेरोजगारों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए बिहार श्रम संसाधन विभाग ने अब अपना रोजगार पोर्टल बनाया है। नौजवानों को भ्रमित करने वाली सरकार को अगर वास्तव में बेरोजगारी की चिन्ता होती तो पहले राज्य सरकार के तहत आने वाले विभागों में रिक्त हजारों पदों पर भर्ती करती। लेकिन सरकार रोटी खाने को देना नहीं चाहती, बस रोटी दिखा कर लोगों को संतुष्टï करना चाहिती है। उनका आरोप है कि नीतीश सरकार ने राज्य के नौजवानों को न रोजगार दिया, उन्हें रोजगार देने के लिए अब तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार भाजपा के एजेंडे पर चल रही है जिससे बिहार का भला होना असंभव है।

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