दहेज प्रथा नहीं रोकी तो मुसलमान समुदाय बर्बाद हो जाएगा – डॉ आसिफ

न दहेज दीजिये न दहेज वाली शादियों में शामिल हों – माइनोरिटीज फ्रंट

IMG_4432नई दिल्ली । आल इंडिया माइनोरिटीज फ्रंट ने मुस्लिम समाज से अनुरोध किया है कि वे देहेज लेने और देने वाले विवाह समारोह में न शामिल हों और शादियां शरियत के मुताबिक करें। समाज के जो सम्पन्न लोग हैं वे सादगी से शादी करें। फिजूलखर्ची को रोकें और उस धन का इस्तेमाल समाज में शिक्षा के स्तर को सुधारने में करने की पहल करें।

ऑल इंडिया माइनोरिटीज फ्रंट के अध्यक्ष डॉ सय्यद मोहम्मद आसिफ ने यहां जारी बयान में कहा है कि दहेज के कारण आत्म हत्या करने वाली आयशा की बेबसी को समाज महसूस करे। ऐसी हत्याएं व आत्म हत्याएं मुस्लिम समाज  पर कलंक जैसी हैं। उन्होंने कहा कि खुलेआम दहेज मांगा जा रहा है, दहेज का भोंडा प्रदर्शन हो रहा है। लडक़ी के मां- बाप -भाई भारी कर्ज में डूब रहे हैं। कर्ज और ब्याज चुकाते चुकाते कंगाल हो रहे हैं। लेकिन दहेज की लानत से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।

डॉ आसिफ ने  कहा कि नमाज, रोजे , जकात, खैरात फितरा ही नहीं, बिना कुछ लिए और दिए निकाह करना भी मुसलमानों पर वाजिब है। इस्लाम में साफ साफ कहा गया है कि निकाह इस तरह से करें कि शादी लडक़ी के परिवार पर बोझ न बने। लेकिन इस वक्त सब कुछ उलटा हो रहा है।  आज मुस्लिम समाज में भी चकाचौंध भरी शादियां करने की हौड़ लगी हुई है. दहेज और शादियों के नाम पर लडक़ी वाले पर इतना बोझ डाल देना सिर्फ समाज के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत के लिए एक बड़ा खतरा है.

फ्रंट के अध्यक्ष डॉ आसिफ ने कहा कि जबसे आयशा का मामला सामने आया है तभी से देशभर के उलेमा और इमामों ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है. इसके खिलाफ तमाम उलेमा एकजुट होकर मुहिम चला रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही दहेज रूपी यह बीमारी मुस्लिम समाज से खत्म होगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी कदम उठाया है. वैसे भी इस्लाम में जो लोग दहेज ले रहे हैं। वह शरीयत के कानून से वाकिफ नहीं हैं।

डॉ आसफि ने बताया कि अल्लाह के रसूल की हदीस है कि जो लोग माल-ओ-दौलत की बुनियाद पर शादियां करते हैं, अल्लाह उन्हें गरीबी में मुब्तला करता है. कोई भी आदमी दुनिया में ऐसा नहीं है जो दहेज लेकर मालदार हो गया हो. बल्कि उनके घरों में गुरबतें आती है।

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