• योगी जी झूठे मामलों में फंसाये जा रहे अल्पसंख्यकों के मामले खत्म कीजिये- डॉ आसिफ

    यूपी का बजट गवाह है कि अल्पसंख्यकों का इस राज में उद्धार नहीं होगा- माइनोरिटीज फ्रन्ट

    IMG_4432नई दिल्ली। आल इंडिया माइनॉरिटीज फ्रन्ट के अध्यक्ष डॉ एस एम आसिफ ने योगी सरकार के बजट 21-22 से एक बार फिर साबित हुआ है कि भाजपा के राज्य में अल्पसंख्यकों का उद्धार संभव नहीं है। इस सरकार ने नए विश्वविद्यालय खोलने व शिक्षा पर भरपूर राशि का प्रावधान किया है लेकिन अल्पसंख्यकों के उत्थान व उनकी शिक्षा के लिए किसी भी तरह के बजट का प्रावधान नहीं किया हैं।

    उन्होंने कहा कि आज  सरकार के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने 5,50,270 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। यूपी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। लेकिन इसमें दलित अल्पसंख्यकों के लिए कोई विशेष बजट का प्रावधान नहीं रखा गया है। कहने को यूपी सरकार का यह बजट युवाओं, किसानों व महिलाओं पर केंद्रित   है। लेकिन महिलाओं के लिए केवल 32 करोड़ धनराशि का प्रावधन है जो ऊंट के मुंह मे जीरा है। यह पहला मौका होगा जब बजट पूरी तरह ‘पेपरलेस’ है। उसी  तरह से यह बजट पूरी तरह से अल्पसंख्यक- दलितलेस बजट बन गया हैं।

    डॉ आसिफ ने यहां जारी बयान में कहा है कि एक ओर सरकार मुसलमानों के विकास में रोड़ा बन गयी है वहीं दूसरी ओर दलित अल्पसंख्यकों पर प्रशासन झूठे मुकदमे दर्ज कर रही। सुशासन का दम भरने वाली सरकार के राज्य में ऐसा होने से उसकी कथनी और करनी पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से अनुरोध किया कि वह अल्पसंख्यकों पर दर्ज तमाम फर्जी मुक़दमों की जांच करायें दोषी पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर और सभी निराधार मुकदमों को वापस लेने के निर्देश जारी करें।

    डॉ आसिफ ने कहा की महिला शक्ति केंद्रों के लिए 32 करोड़  बहुत कम हैं। यह राशि हर जिले के हिसाब से कम से कम एक एक करोड़ निर्धारित की जानी चाहिए। ऐसा होने से महिला स्वावलंबन और उनका वास्तव शसक्तीकरण में हो पायेगा।

  • جھوٹے معاملوں میں پھنسائے جارہے اقلیتوں کے مقدمات ختم کریں یوگی جی: ڈاکٹر آصف

    یوپی کا بجٹ گواہ ہے کہ اقلیتوں کی اس ریاست میں فلاح نہیں ہوگی: اے آئی ایم ایف

    sm-asif-pic1نئی دہلی22 فروری
    آل انڈیا مائنارٹیزفرنٹ کے صدر ڈاکٹر ایس ایم آصف نے یوگی حکومت کے بجٹ 21-22 سے ایک بار پھر ثابت کیا ہے کہ بی جے پی کی ریاست میں اقلیتوں کی نجات ممکن نہیں ہے۔ اس حکومت نے نئی یونیورسٹیاں کھولنے اور تعلیم پر مناسب رقم فراہم کرنے کا انتظام کیا ہے لیکن اقلیتوں کی ترقی اور ان کی تعلیم کے لئے کوئی انتظام نہیں کیا ہے۔

    انہوں نے کہا کہ آج حکومت کے وزیر خزانہ سریش کھنہ نے 550270 کروڑ روپئے کا بجٹ پیش کیا ہے۔ اس میں یوپی کی تاریخ کا سب سے بڑا بجٹ ہے لیکن دلت اقلیتوں کے لئے کوئی خاص بجٹ کی فراہمی نہیں ہے۔ یہ کہنا کہ یوپی حکومت کا یہ بجٹ نوجوانوں ، کسانوں اور خواتین پر مرکوز ہے لیکن خواتین کے لئے صرف 32 کروڑ کی فراہمی ہے جو اونٹ کے منہ میں زیرہ ہے۔ یہ پہلا موقع ہوگا جب بجٹ مکمل طور پر پیپر لیس نہیں ہوگا۔ اسی طرح یہ بجٹ مکمل طور پر اقلیتی دلت کا بجٹ بن گیا ہے۔

    ڈاکٹر آصف نے یہاں جاری ایک بیان میں کہا ہے کہ ایک طرف حکومت مسلمانوں کی ترقی میں رکاوٹ بن چکی ہے اور دوسری طرف انتظامیہ دلت اقلیتوں کے خلاف جھوٹے مقدمات درج کررہی ہے۔ ریاست میں حکومت کی گڈ گورننس کی وجہ سے اس طرح کے سوالات کھڑے ہوئے ہیں۔ انہوں نے وزیر اعلی یوگی سے اقلیتوں کے خلاف درج تمام جعلی مقدمات کی تحقیقات کرنے ، قصوروار پولیس افسران کو معطل کرنے اور تمام بے بنیاد مقدمات واپس لینے کی ہدایت جاری کرنے کی درخواست کی۔

    ڈاکٹر آصف نے کہا کہ مہیلا شکتی مرکزوں کے لئے 32 کروڑ روپے بہت کم ہیں۔ ہر ضلع کے مطابق یہ رقم کم از کم ایک کروڑ مقرر کی جانی چاہئے۔ ایسا ہونے سے خواتین خود انحصار اور حقیقی خودمختار ہوپائیںگی۔

  • बागान श्रमिकों को उनका हक दे ममता सरकार- डॉ आसिफ

    बंगाल में खेत मजदूरों की हालात भुखमरी जैसी-माइनोरिटीज फ्रन्ट

    IMG_4432नई दिल्ली। आल इंडिया माइनोरिटीज फ्रन्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहा है कि वे खेत मज़दूरों खासकर चाय बागान श्रमिकों की स्थिति सुधरने के लिए तुरंत ऐसे कदम उठाएं जिससे उनकी भुखमरी खत्म हो और उनके शोषण पर रोक लगे।

    आल इंडिया माइनोरिटीज फ्रन्ट के अध्यक्ष डॉ सैयद मोहम्मद आसिफ ने यहां जारी बयान में कहा है कि प्रदेश में खेत मजदूरों और बागान श्रमिकों की स्तिथि  अत्यंत दयनीय है। न तो उन्हें भरपेट भोजन, न ही सिर छिपाने की मजबूत छत नसीब है। और तो और बागान क्षेत्र में पत्ती तोड़ने के दौरान अक्सर जंगली जानवरों के हमले में श्रमिक अपनी जान तक गंवा देते हैं। उन्होंने कहा की ममता दीदी की  सरकार प्रदेश के लोगों को भाजपा की साम्प्रदायिकता का हव्वा दिखाकर व अन्य राजनैतिक दलों की निंदा करके दोबारा सत्ता में नहीं आ सकती। सत्ता में वापसी के लिए उसको आम जन खासकर मजदूर वर्ग को शोषण से मुक्ति के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।

    डॉ आसिफ ने आरोप लगाया कि ममता दीदी ने प्रदेश में उद्योगों का विस्तार को रोका  ही नहीं बल्कि मजदूरों के कल्याण के लिए सकारात्मक कदम भी नहीं उठाए। इसके चलते उनका जनाधार जनता में सिकुड़ रहा है और तृणमूल कांग्रेस के साथ रहने वाले राजनैतिक दल एक के बाद एक उनका साथ छोड़ कर जा रहे हैं।  फ्रन्ट के अध्यक्ष ने कहा कि इन सबके चलते ममता दीदी के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गयी हैं।

    डॉ आसिफ ने बताया कि दार्जलिंग , जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में ही 302 चाय बागान है। इसके अलावा कुछ अन्य छोटे बागान भी इसमें शामिल है। इन बागानों में कुल 3.40 लाख श्रमिक दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। महंगाई के इस दौर में उनकी दिहाड़ी इतनी कम है कि अधिकतर श्रमिक कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। इन क्षेत्रों में अब भी करीब 15 चाय बागान बंद पड़े हैं।

    उन्होंने बताया कि यहां प्रत्येक श्रमिक को प्रतिदिन 25 किलो चाय पत्ती तोड़ना अनिवार्य है। इसमें आठ से नौ घंटे लगते हैं। अगर कम तोड़ा तो तीन रुपये प्रतिकिलो की दर से कटौती होती है। जबकि अधिक तोड़ने पर मात्र डेढ़ रुपये प्रति किलो का भुगतान होता है। वर्तमान समय में श्रमिकों को 202 रुपये प्रतिदिन की दर मजदूरी मिलती है। यह न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।

    डॉ आसिफ ने कहा बताया कि श्रमिकों के हित में केंद्र सरकार बजट में 1000 करोड़ का पैकेज दिया है। मगर राज्य सरकार व चाय बागान मालिकों का रवैया श्रमिकों के प्रति ठीक नहीं है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  को खेत मजदूरों व बागान श्रमिकों के लिए खुद पैकेज की घोषणा कर अविलंब उसे लागू करना चाहिए।

  • ممتا حکومت شجرکاری کارکنوں کو ان کے حقوق دلوائے:ڈاکٹر آصف

    بنگال میں کھیت مزدوروں کی حالت فاقہ کشی جیسی :اے آئی ایم ایف

    sm-asif-pic1نئی دہلی20 فروری
    آل انڈیا مائناریٹیزفرنٹ نے مغربی بنگال کی وزیر اعلی ممتا بنرجی سے کہا ہے کہ وہ بھوک ختم کرنے اور استحصال کو روکنے کے لئے کھیت مزدوروں خصوصا چائے کے پودے لگانے والے مزدوروں کی صورتحال کو بہتر بنانے کے لئے فوری طور پر اقدامات کرے۔

    آل انڈیامائناریٹیزفرنٹ کے صدر ڈاکٹر سید محمد آصف نے یہاں جاری ایک بیان میں کہا ہے کہ ریاست میں کھیت مزدوروں اور شجرکاری مزدوروں کی حالت انتہائی قابل رحم ہے۔ نہ ہی ان کے پاس پیٹ بھر کھانا اور نہ ہی اپنے سر چھپانے کے لئے مضبوط چھت ہے ۔ مزید یہ کہ شجرکاری کے علاقے میں پتیوں کو توڑنے کے دوران جنگلی جانوروں کے حملے میں مزدور اکثر اپنی جان سے ہاتھ دھو بیٹھتے ہیں۔ انہوں نے کہا کہ ممتا دیدی کی حکومت ریاست کے عوام کو بی جے پی کی فرقہ واریت کا سبب دکھا کر اور دوسری سیاسی جماعتوں کی مذمت کرکے اقتدار میں واپس نہیں آسکتی ہے۔ اقتدار میں واپس آنے کے لئے عام لوگوں خصوصا مزدور طبقے کو استحصال سے آزاد کرنے کے لئے سخت اقدامات کرنا ہوں گے۔

    ڈاکٹر آصف نے الزام لگایا کہ ممتا دیدی نے نہ صرف ریاست میں صنعتوں کی توسیع کو روکا بلکہ مزدوروں کی فلاح و بہبود کے لئے بھی مثبت اقدامات نہیں کیے۔ اس کی وجہ سے عوام میں اس کی بنیاد سکڑ رہی ہے اور وہ سیاسی جماعتیں جو ترنمول کانگریس کے ساتھ ہیں ایک کے بعد ایک اسے چھوڑ رہی ہیں۔ محاذ کے صدر نے کہا کہ ان سب کی وجہ سے ممتا دیدی کے سامنے بڑے چیلنجز پیدا ہوگئے ہیں۔
    ڈاکٹر آصف نے بتایا کہ خود دارجلنگ ، جلپائی گوڑی اور علی پورڈوڑ میں 302 چائے کے باغات ہیں۔ اس کے علاوہ کچھ دوسرے چھوٹے باغات بھی اس میں شامل ہیں۔ ان باغات میں کل 3.40 لاکھ مزدور روزانہ مزدور کے طور پر کام کرتے ہیں۔ مہنگائی کے اس دور میں ان کی روز مرہ کی اجرت اتنی کم ہے کہ زیادہ تر کارکن غذائی قلت کا شکار ہوجاتے ہیں۔ ان علاقوں میں ابھی تک 15 چائے کے باغات بند ہیں۔

    انہوں نے بتایا کہ ہر کارکن کے لئے روزانہ 25 کلوگرام چائے کے پتے اتارنا لازمی ہے۔ اس میں آٹھ سے نو گھنٹے لگتے ہیں۔ اگر کم توڑا تو تین کلوگرام فی کلوگرام کی شرح سے کٹوتی کی جاتی ہے۔ جبکہ زیادہ توڑنے کے لئے فی کلو صرف ڈیڑھ روپیہ ادا کیا جاتا ہے۔ اس وقت مزدوروں کو 202 روپے یومیہ اجرت ملتی ہے۔ یہ کم سے کم اجرت سے کم ہے۔
    ڈاکٹر آصف نے کہا کہ کارکنوں کے مفاد میں مرکزی حکومت نے بجٹ میں 1000 کروڑ کا پیکیج دیا ہے لیکن ریاستی حکومت اور چائے کے پودے لگانے والوں کا رویہ مزدوروں کے ساتھ اچھا نہیں ہے۔انہوں نے کہا کہ وزیر اعلی ممتا بنرجی کو چاہئے کہ وہ کھیت مزدوروں اور شجرکاری کارکنوں کے لئے پیکیج کا اعلان کریں اور اس پر فوری عمل درآمد کریں۔

  • रसोई गैस, पेट्रोल ,डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर आंदोलन

    aimfAIMF वेस्ट बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष श्री मोहम्मद अली जिन्ना ने पेट्रोल डीजल और रसोई गैस के बढ़ते कीमतों को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के विरुद्ध आज एक रैली का आयोजन कर केंद्र और राज्य सरकार से बढ़ती कीमतों को घटाने की मांग की है!

    आज देश में पहली बार पेट्रोल की कीमत  102 से भी ज्यादा हो गया है, रसोई गैस की कीमत मैं इतनी वृद्धि हो गई है के जिसकी वजह से जनता का जीना दुर्लभ हो गया है, केंद्र सरकार की नीति के कारण आज पूरे देश में लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं !

    श्री जिन्ना ने आम जनता से अपील की है कि केंद्र सरकार के विरुद्ध एकजुट होकर हम अपने हक की लड़ाई लड़े AIMF के प्रदेश अध्यक्ष श्री जिन्ना ने कहा आज भारतीय जनता पार्टी बंगाल में बदलाव की बात कर रही है  क्या जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने पूरे देश में बदलाव किया है क्या इसी तरह बंगाल में भी बदलाव करेगी जिस तरह देश में जातिवाद हिंदू मुस्लिम राजनीति में धार्मिक नारा लगाना वोट के खातिर लोगों को धर्म के नाम पर बांटना क्या ऐसा ही बदलाव भारतीय जनता पार्टी बंगाल में करेगी ?

    श्री जिन्ना ने कहा कि इससे पहले भी भारतीय जनता पार्टी केंद्र में सत्ता में आने से पहले उन्होंने जनता से झूठा वादा किया कि हर वर्ष नौजवानों को एक करोड़ नौकरी देंगे विदेश से काला धन वापस लाएंगे और भारत के सभी नागरिक के खाते में 1500000 देंगे, किसानों की दुगनी आय कर देंगे लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं दिया विपक्ष ने जब इन बातों का सवाल किया तो भारतीय जनता पार्टी ने इसे जुमला करार दिया वोट के खातिर और विकास के झूठे वादे पर भारतीय जनता पार्टी देश को कब तक गुमराह करती रहेगी अब समय आ गया है कि भारतीय जनता पार्टी को बंगाल में आने से हम सब बंगाल वासियों को रोकना होगा!

  • رسوئی گیس ، پٹرول ، ڈیزل کی بڑھتی قیمتوں پر احتجاج

    aimfکولکاتہ 18 فروری
    اے آئی ایم ایف مغربی بنگال کے ریاستی صدر جناب محمد علی جناح نے پیٹرول ، ڈیزل اور ایل پی جی کی بڑھتی قیمتوں پر مرکزی حکومت اور ریاستی حکومت کے خلاف آج ایک ریلی کا انعقاد کیا ہے اور مرکزی اور ریاستی حکومت سے بڑھتی ہوئی قیمتوں کو کم کرنے کا مطالبہ کیا ہے!

    آج ملک میں پہلی بار ، پیٹرول کی قیمت میں 102 روپے سے زیادہ کا اضافہ ہوا ہے ، ایل پی جی کی قیمت میں اتنا اضافہ ہوا ہے جس کی وجہ سے لوگوں کی زندگی نایاب ہوچکی ہے ، مرکزی حکومت کی پالیسی کی وجہ سے ملک بھر کے لوگ آج فاقہ کشی کے دہانے پر پہنچ گئے! مسٹر جناح نے عام لوگوں سے اپیل کی ہے کہ ہم متحد طور پر مرکزی حکومت کے خلاف اپنے حقوق کے لئے جدوجہد کریں ۔

    اے آئی ایم ایف کے ریاستی صدر مسٹر جناح نے کہا کہ آج بھارتیہ جنتا پارٹی بنگال میں تبدیلی کی بات کر رہی ہے۔ پورے ملک میں تبدیلیاں کی گئی ہیں۔ کیا یہ بنگال میں اسی طرح ملک میں ہندو مسلم سیاست میں ذات پات کے نعرے لگانے ، ووٹوں کی خاطر مذہب کے نام پر لوگوں کو تقسیم کرنے کے لئے ، کیا بھارتیہ جنتا پارٹی بھی اسی طرح کی تبدیلیاں لائے گی؟ بنگال میں مسٹر جناح نے کہا کہ مرکز میں بھارتیہ جنتا پارٹی کے اقتدار میں آنے سے پہلے ہی انہوں نے عوام سے غلط وعدہ کیا تھا کہ ہر سال نوجوانوں کو ایک کروڑ نوکری دی جائے گی ، بیرون ملک سے کالا دھن واپس لائیں گے اور تمام شہریوں کے کھاتے میں 1500000دیںگے ۔کسانوں کی آمدنی سے دگنی کردیںگے ، لیکن انہوں نے کچھ نہیں دیا۔جب حزب اختلاف نے ان چیزوں پر سوال اٹھایا تو بھارتیہ جنتا پارٹی نے اسے جملہ قرار دیا۔بھارتیہ جنتا پارٹی کب تک اس جھوٹے پر ملک کو گمراہ کرتی رہے گی۔ اب وقت آگیا ہے کہ بھارتیہ جنتا پارٹی کو بنگال کے تمام لوگوں کو بنگال آنے سے روکنا ہوگا!

  • जम्मू और कश्मीर में राजनैतिक व्यवस्था बहाल करे मोदी सरकार-डॉ आसिफ

    कश्मीरी पंडितों की घर वापसी से स्थिति सामान्य बनेगी -माइनोरिटीज फ्रंट

    home1नई दिल्ली। आल इंडिया माइनोरिटीज फ्रंट के अध्यक्ष डॉ एस एम आसिफ ने कहा है कि अब समय आ गया है कि केन्द्र सरकार जम्मू -कश्मीर और लद्दाख में राजनैतिक व्यवस्था सामान्य कर दे। नजरबन्द नेताओं को भी मुक्त कर दे ताकि वे अपने क्षेत्र में खुली राजनैतिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में अपना भरपूर सहयोग दे सकें।

    डॉ आसिफ ने यहां जारी बयान में कहा है कि जम्मू कश्मीर व लद्दाख से आ रही रिपोर्टस के अनुसार वहां जनजीवन सामान्य हो चला है। सरकार ने जिस उद्देश्य से इस क्षेत्र की राजनैतिक व्यवस्था में बदलाव किया और केन्द्र का शासन लगाया वहां स्थापित किया उससे वहां पाक प्रायोजित मिलीटेंसी नियंत्रण में आ गई लगती है। पूरे भारत में जिस तरह से नागरिकों को उनके अधिकार हासिल हैं उसी तरह से जम्मू कश्मीर और लद्दाख के नागरिकों को वह अधिकार मिलना चाहिए।

    माइनोरिटीज फ्रंट के अध्यक्ष डॉ आसिफ ने कहा कि जम्मू कश्मीर क्षेत्र से धारा 370 हटने के बाद जब कोई तूफान नहीं खड़ा हुआ इसका मतदल सभी राष्टï्रीय राजनैतिक दलों को परोक्ष रूप से केन्द्र सरकार का यह कदम स्वीकार्य लगता दिखाई दे रहा है। इसलिए उस क्षेत्र में अब राष्टï्रपति शासन की आवश्यकता नहीं रह गई है। सरकार को चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत करनी चाहिए। और संघ शासित जम्मू व कश्मीर को एक रखते हुए उन्हें राज्य का दर्जा प्रदान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में राजनैतिक व्यवस्था बहाल करने से वहां विकास और रोजगार की स्थितियां बेहतर बनेंगी। इस क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ी है। पर्यटन की स्थिति बदतर हो गई है। उन्होंने कहा कि वहां लोगों की तंगहाली खत्म करने व रोजगारी सृजन के लिए सरकार को विशेष आर्थिक पैकेज की देना चाहिए। डॉ आसिफ ने कहा कि देश की राजनैतिक व्यवस्था पर भरोसा करने के लिए सरकार द्वारा उक्त कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

  • جموں وکشمیر میں سیاسی نظام بحال کرے مودی حکومت:ڈاکٹر آصف

     کشمیری پنڈتوں کی وطن واپسی سے صورتحال معمول کے ہوجائے گی: اے آئی ایم ایف

    sm-asif-pic1نئی دہلی18 فروری
    آل انڈیا مائنارٹیزفرنٹ کے صدر ڈاکٹر ایس ایم آصف نے کہا ہے کہ اب وقت آگیا ہے کہ مرکزی حکومت جموں و کشمیر اور لداخ میں سیاسی نظام کو معمول پر لائے۔ نظربند لیڈران کو بھی آزاد کرنا چاہئے تاکہ وہ اپنے خطے میں کھلے سیاسی نظام کو بہتر بنانے میں اپنا بھر پور تعاون دے سکیں۔

    ڈاکٹر آصف نے یہاں جاری ایک بیان میں کہا ہے کہ جموں و کشمیر اور لداخ سے آنے والی اطلاعات کے مطابق وہاں زندگی معمول بن گئی ہے۔ جس کے مقصد سے حکومت نے خطے کے سیاسی نظام کو تبدیل کیا اور مرکز کی حکمرانی قائم کی ، ایسا لگتا ہے کہ وہاں پاک سرانجام دینے والی عسکریت پسندی کا کنٹرول موجود ہے۔ جموں وکشمیر اور لداخ کے شہریوں کو یہ حق اسی طرح ملنا چاہئے جس طرح ہندوستان بھر میں شہریوں کو ان کا حق حاصل ہے۔

    اے آئی ایم ایف صدر ڈاکٹر آصف نے کہا کہ جموں و کشمیر خطے سے آرٹیکل 370 کے انخلا کے بعد جب کوئی طوفان نہیں اٹھا تو مرکزی حکومت کی بالواسطہ کارروائی میں تبدیلی تمام قومی سیاسی جماعتوں کے لئے قابل قبول نظر آتی ہے۔ لہذا اس علاقے میں اب صدارتی حکمرانی کی ضرورت نہیں ہے۔ حکومت انتخابی عمل کا آغاز کرے اور یونین کے زیر اقتدار جموں و کشمیر کو ایک رکھے ہوئے انہیں ریاست کا درجہ دلایا جانا چاہئے۔ انہوں نے کہا کہ اس پورے خطے میں سیاسی نظام کی بحالی سے وہاں ترقی اور روزگار کے حالات بہتر ہوں گے۔ خطے میں بے روزگاری میں اضافہ ہوا ہے۔ سیاحت کی صورتحال ابتر ہوگئی ہے۔ انہوں نے کہا کہ حکومت عوام کی پریشانی کے خاتمے اور روزگار کے مواقع پیدا کرنے کے لئے خصوصی معاشی پیکیج دے۔ ڈاکٹر آصف نے کہا کہ حکومت ملک کے سیاسی نظام پر اعتماد کرنے کے لئے مذکورہ بالا اقدامات ضروری ہے۔

  • बजट में अल्पसंख्यकों के साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा बर्ताब -डॉ आसिफ

    सबका साथ चाहिए सबका विकास कौन करेगा मोदी जी- माइनॉरिटीज फ्रन्ट

    IMG_4432नई दिल्ली। आल इंडिया माइनॉरिटीज फ्रन्ट के अध्यक्ष डॉ सैयद मोहम्मद आसिफ ने कहा है कि वर्ष 2021- 22 के बजट में अल्पसंख्यकों की उपेक्षा का क्रम को जारी रखा गया है। वित्तमंत्री सीताराम ने गत वर्ष के संशोधित बजट में ही नहीं बल्कि इस वर्ष के अल्पसंख्यकों को आवंटित बजट में भारी कटौती करके देश के अल्पसंख्यकों को निराश किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने उन्हें बजट प्राथमिकताओं में बिल्कुल पीछे रहने को मजबूर कर दिया है। इस बजट से न केवल मुसलमान घाटे में है बल्कि सिख , ईसाई, जैन, पारसी, बौद्ध व अन्य धार्मिक समूह निराश हुए हैं।

    डॉ आसिफ ने कहा वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास की बात करते हैं लेकिन जब अल्पसंख्यकों की बात होती है, तब उन्हें देने के लिए प्रधानमंत्री की झोली में कुछ खास नहीं मिलता।

    डॉ आसिफ ने कहा कि मोदी सरकार को अपनी कथनी और करनी में समानता लानी होगी।
    अल्पसंख्यक मंत्रालय  के लिए इस बार बजट में 4810.77 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  वित्त वर्ष 2020-21 में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए बजट 5029 करोड़ रुपये था, चूंकि मंत्रालय ने आवंटित राशि खर्च नहीं कि इसलिए बाद में संशोधित आवंटन 4005 करोड़ रुपये कर दिया गया।

    माइनॉरिटीज फ्रन्ट के अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना काल भारत मे खत्म होने की दिशा में है। इस महामारी के चलते पर्यटन उद्योग को चौपट हो गया था।  , अब जब हालात बदल रहे हैं पर्यटन , खेलों की सख्त जरूरत है ,ऐसे में इस सरकार ने इन दोनों मदों में बजट राशि मे कटौती कर के पर्यटन और खेलों की प्रगति में रुकावट खड़ी कर दी  है। सब जानते हैं कि देश के अनेक शहर और कस्बे पर्यटन पर आश्रित हैं। इसी तरह खेल व खेल आयोजनों से आर्थिक स्तिथि  में सुधार आता है और युवाओं के शरीर और मानसिक स्तिथि बेहतर बनती है। हैरत की बात है कि  पर्यटन मंत्रालय का आवंटन 19 प्रतिशत घटा दिया गया।
    पहले  आवंटित 2,500 करोड़ रुपये से घटा कर 2026.77 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

    बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1088.03 करोड़ रुपये के प्रावधान किए गए हैं. उन्होंने बताया कि खेल मंत्रालय को 230 करोड़ कम राशि का प्रवधान है। वर्ष 2021-22 के बजट में खेल और युवा कार्य मंत्रालय को 2596.14 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं.  खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन का बजट 70 करोड़ रुपये से घटाकर 53 करोड़ रूपये कर दिया गया. वहीं 2010 राष्ट्रमंडल खेल साभी स्टेडियमों की मरम्मत का बजट 75 करोड़ रूपये से घटाकर 30 करोड़ रूपये कर दिया गया. उन्होंने कहा कि स्वस्थ और  शक्तिशाली भारत के लिए तीनों क्षेत्रों में बजट राशि कम किया जाना देश के हित में नहीं है। उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि सरकार बजट पारित करने से पहले इन कमियों को दूर करेगी।

  • بجٹ میں اقلیتوں کے ساتھ دوسرے درجے کے شہریوں جیسا برتاﺅ: ڈاکٹر آصف

    سب کا ساتھ چاہئے سب کا وکاس کون کرے گا مودی جی: اے آئی ایم ایف

    sm-asif-pic1نئی دہلی06فروری
    آل انڈیا مائنارٹیزفرنٹ کے چیئرمین ڈاکٹر سید محمد آصف نے کہا ہے کہ 2021-22 کے بجٹ میں اقلیتوں کی نظرانداز کرنے کا حکم جاری رکھا گیا ہے۔ وزیر خزانہ سیتارامن نے پچھلے سال کے نظرثانی شدہ بجٹ میں ہی نہیں بلکہ اس سال کی اقلیتوں کے لئے مختص بجٹ میں زبردست کمی کرکے ملک کی اقلیتوں کو مایوس کیا ہے۔

    وزیر اعظم نریندر مودی حکومت نے انہیں بجٹ کی ترجیحات میں پیچھے رہنے پر مجبور کیا ہے۔ نہ صرف مسلمان نقصان میں ہیں بلکہ سکھ ، عیسائی ، جین ، پارسی ، بدھ مت اور دیگر مذہبی گروہ بھی اس بجٹ سے مایوس ہیں۔

    ڈاکٹر آصف نے کہا کہ اگرچہ وزیر اعظم نریندر مودی سب کا ساتھ سب کا وکاس کی بات کرتے ہیں لیکن جب بات اقلیتوں کی ہو تو پھر وزیر اعظم کے بیگ میں ان کو دینے کے لئے کوئی خاص بات نہیں ہے۔

    ڈاکٹر آصف نے کہا کہ مودی سرکار کو اپنے قول اور فعل میں مساوات لانا ہوگی۔
    وزارت اقلیت کے لئے اس بار بجٹ میں 4810.77 کروڑ روپئے کی فراہمی کی گئی ہے۔ مالی سال 2020-21 میں وزارت اقلیتی امور کے لئے بجٹ 5029 کروڑ روپے تھا ، چونکہ وزارت نے مختص رقم خرچ نہیں کی ، لہذا بعد میں اس ترمیم شدہ مختص کو بڑھا کر 4005 کروڑ روپئے کردیا گیا۔

    اقلیتی محاذ کے صدر نے کہا کہ کرونا دور ہندوستان میں ختم ہونے کی سمت ہے۔ اس وبا کی وجہ سے سیاحت کی صنعت تباہ ہوگئی۔ اب جب صورتحال بدل رہی ہے تو سیاحت اور کھیلوں کی اشد ضرورت ہے ، اس صورتحال میں اس حکومت نے ان دونوں اشیا میں بجٹ کی رقم میں کمی کرکے سیاحت اور کھیلوں کی ترقی میں رکاوٹ پیدا کردی ہے۔ سب جانتے ہیں کہ ملک کے بہت سے شہر اور قصبے سیاحت پر منحصر ہیں۔ اسی طرح کھیل اور کھیل کے واقعات معاشی حالت کو بہتر بناتے ہیں اور نوجوانوں کے جسمانی اور ذہنی حالت کو بہتر بناتے ہیں۔ حیرت کی بات یہ ہے کہ وزارت سیاحت کی مختص رقم میں 19 فیصد کمی واقع ہوئی۔

    2026.77 کروڑ کو پہلے مختص کی گئی 2500 کروڑ روپے سے کم کیا گیا ہے۔ انفراسٹرکچر کی ترقی کے لئے 1088.03 کروڑ روپے کی فراہمی کی گئی ہے۔ انہوں نے بتایا کہ وزارت کھیل کے پاس 230 کروڑ کم رقم کی فراہمی ہے۔ 2021-22 کے بجٹ میں وزارت کھیل اور نوجوانوں کے امور نے 2596.14 کروڑ روپئے مختص کیے ہیں۔ کھلاڑیوں کے لئے ترغیبی بجٹ 70 کروڑ روپے سے گھٹ کر 53 کروڑ روپے کردیا گیا۔ اسی کے ساتھ ہی 2010 کے دولت مشترکہ کھیلوں کے تمام اسٹیڈیموں کی مرمت کا بجٹ 75 کروڑ روپے سے گھٹ کر 30 کروڑ روپے کردیا گیا۔

    انہوں نے کہا کہ صحت مند اور طاقتور ہندوستان کے لئے تینوں شعبوں میں بجٹ کی رقم کو کم کرنا ملکی مفاد میں نہیں ہے۔ انہوں نے اس امید کا اظہار کیا کہ حکومت بجٹ کو منظور کرنے سے پہلے ان خامیوں کو دور کردے گی۔